कट्टर हिंदू हो?

ठीक है, यह गर्व की बात है! मैं सहमत हूँ.... परंतु फिर कट्टर हो कर अपने हिंदू धर्म का पालन भी तो करो... ईश्वर की स्तुति करो,,, दान-पुण्य करो,,,, तीर्थाटन करो,,,, यदि 'शैव' या 'वैष्णव' हो तो माँस-मदिरा का त्याग भी करो,,,, श्रीमद् भागवत'गीता' का प्रसार करो... इत्यादि इत्यादि
पर यार उसमें ये मस्जिदों से और मुसलमानों से होड़ लेने का तुम्हारा क्या तुक है ? छोड़ों परे,,,,, वो जो करें, उन्हें करने दो ! हमें क्या प्रॉब्लम है, क्या वो नमाज़ पढ़ने हमारे घरों में या मंदिरों में आ रहे हैं?
आज के युग में फेसबुक और त्वरित प्रचार माध्यमों से लोगों के दिमाग़ में ज़हर भर देना बड़ा आसान होता है,,,, और हम भारतीय लोग भड़क भी जल्दी जाते हैं.. पर उन्हीं दिमाग़ों से ज़हर को बाहर निकालने में बरसों लगते हैं, यकीन न हो तो कभी कोशिश करके देखना
"खता लम्हे करते हैं,,,, और सज़ा सदियों को मिलती है" मत करो घृणा किसी से
कर भला हो भला! अंत भले का भला-आपका शान रंगरेज़

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